‘पैड स्क्वाड मूवमेंट’ में शामिल हुए जयपुर के जितेश ठाकुर और आंचल मिश्रा

जयपुर। कोविड-19 संकट के दौरान समाज की महिलाओं और युवतियों के मासिक धर्म स्वास्थ्य और स्वच्छता की जरूरतों की पूर्ति को सुनिश्चित करने के लिए जयपुर की आंचल मिश्रा हाल ही में क्रांतिकारी ‘पैड स्क्वाड मूवमेंट’ में शामिल हुई हैं। 17 वर्षीय आंचल भारत की सबसे कम उम्र की ‘पैडस्क्वाडर’ हैं और वर्तमान में वे जयपुर के जयश्री पेरीवाल इंटरनेशनल स्कूल में 12वीं कक्षा में पढ़ रही हैं। महामारी के चलते न केवल गरीब समुदायों के लिए भोजन जैसी बुनियादी जरूरतों में कमी आ गई है बल्कि सैनेटरी पैड जैसे मासिक धर्म स्वच्छता उत्पाद भी इन क्षेत्रों में रहने वाली महिलाओं के लिए लक्जरी बन गए हैं। जयपुर के जितेश ठाकुर भी उनके साथ शामिल हैं, जो भारत के प्रथम पुरुष ‘पैडस्क्वाडर’ हैं। दोनों ने मिलकर सी-स्कीम और राजापार्क में रहने वाली महिलाओं को लगभग 1500 सैनेटरी पैड वितरित करके अपना पहला अभियान पूरा किया है।

इस मूवमेंट में शामिल होने के बारे में आंचल ने बताया कि अभी भी समाज का बड़ा हिस्सा ऐसा है जो कि बुनियादी मासिक धर्म स्वच्छता से अनजान है। कई महिलाएं सैनेटरी पैड की जगह अब भी कपड़े का इस्तेमाल करती हैं। पैड स्क्वाड महिलाओं को उनके मेंस्ट्रुअल साइकिल के दौरान बेहतर स्वच्छता बनाए रखने की दिशा में एक अच्छा मंच है। आंचल जयपुर में हस्तशिल्प को बढ़ावा देने जैसे कई अन्य सामाजिक गतिविधियों में भी शामिल हैं।

जितेश ठाकुर ने कहा कि, “महिलाओं की मासिक धर्म स्वच्छता लंबे समय से एक ऐसा मुद्दा है जो पुरूषों से अछूता रहा है। मेरा मानना है कि मासिक धर्म स्वच्छता पर हमारे देश में तत्काल ध्यान देने की आवश्यकता है। कई पुरुष इस तरह के मूवमेंट्स में शामिल होने में संकोच करते हैं, मैं  इस पहल में  अग्रणीय बनना चाहता था ताकि अधिक से अधिक पुरुष प्रेरित हों और इस मूवमेंट में शामिल हों।”

इस मूवमेंट को जयपुर में लाने के बारे में बताते हुए ‘पैड स्क्वाड’ की सह-संस्थापक चित्रा सुब्रमण्यम ने कहा कि यह बेहद खुशी की बात है कि आंचल मिश्रा जैसे युवा जयपुर में वंचित समुदायों के स्वास्थ्य और गरिमा को बनाए रखने में रुचि रखते हैं। इतना ही नहीं, पैडस्क्वाडर जितेश ठाकुर मूवमेंट में शामिल होने वाले पहले पुरुष होने से मासिक धर्म स्वच्छता से जुड़ी जेंडर दुविधाओं को तोड़ने में मदद कर रहे हैं।

पैड स्क्वाड के बारे में
‘पैड स्क्वाड’ मूवमेंट’ भारत के लोगों का मूवमेंट है जिसकी शुरूआत 1 जून 2020 में हुई। यह व्यक्ति को व्यक्तिगत-सामाजिक ज़िम्मेदारी लेने और अपने इलाके, शहर या गांव की आर्थिक रूप से वंचित महिलाओं को सैनिटरी पैड वितरित करने में सक्षम बनाता है। यह मूवमेंट महिलाओं एवं लड़कियों के मासिक धर्म की गरिमा और स्वास्थ्य को बनाए रखने के लिए प्रतिबद्ध है। ‘घर बचाओ घर बनो आंदोलन’ और भारत भर में अन्य स्वैच्छिक सहयोग नेटवर्क जो समुदायों के साथ काम करते हैं, के माध्यम से ‘पैड स्क्वाड’ लोगों तक पहुंचता है। वर्तमान में ‘पैड स्क्वाड’ 21 शहरों में कार्यरत है और हर दिन बढ़ते आंकड़ों के साथ लगभग 25 समुदायों को पैड प्रदान करा रहा है।

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