एक रुपए में संगीत की शिक्षा, मकसद है संगीत के जरिए शांति फैलाना

नई दिल्ली। पेशे से सिविल इंजीनियर, कई बड़ी कंपनियों में काम कर चुके, लेकिन आजकल दिल्ली के आंध्र भवन के सामने एक रुपए में लोगों को संगीत सिखा रहे हैं, मकसद है संगीत के जरिए शांति फैलाना और स्वच्छ भारत की तरह ‘संगीत भारत’ अभियान शुरू करना। इस संगीतज्ञ का नाम एसबी राव है, लेकिन लोग इनको ‘गिटार राव’ के नाम से भी बुलाते हैं। राव का जन्म आंध्र प्रदेश में हुआ। इन्होंने कई साल तक एक प्राइवेट कंपनी में सिविल इंजीनियर के रूप में काम किया। जब नौकरी करते थे तब किसी कारणवश कर्ज़ में डूब गए। धीरे-धीरे यह कर्ज उनके लिए बोझ बनता चला गया। बाद में वे नौकरी के साथ-साथ घर छोड़कर तिरुपति चले गए। तिरुपति की एक संगीत अकादमी में इन्होंने संगीत सीखना शुरू कर दिया। संगीत इनका तनाव कम करने में कामयाब रहा। राव फिर घर वापस आ गए लेकिन यह भी तय किया कि लोगों को संगीत सिखाएंगे। फिलहाल राव आंध्र भवन की लॉबी में जनरल वर्कर के साथ सो जाते हैं। जनरल बाथरूम का इस्तेमाल करते हैं। सिर्फ एक-दो जोड़ी कपड़े हैं लेकिन साथ में चार-पांच गिटार और कई बांसुरियां हैं। इन्होंने दिल्ली में 100 दिनों तक लगातार संगीत सिखाया। बाद में पेड़ के नीचे संगीत सिखाना शुरू कर दिया। सुबह 7 से 9 बजे तक आंध्र भवन के सामने संगीत सिखाते हैं। दोपहर में 2 से शाम 6 बजे तक विजय चौक पर सिखाते हैं। इसके बाद शाम 6 से 9 बजे तक इंडिया गेट के लॉन में इनके संगीत की धुनें सुनाई देती हैं। इस संगीत सिखाने के सिलसिले के साथ खाली बचे समय में राव पढ़ाई करते हैं। अभी डिस्टेंस एजुकेशन के जरिए संगीत में बीए कर रहे हैं। राव कई बड़े लोगों को संगीत सिखा चुके हैं जिसमें पुलिस अफसर से लेकर कई नेता शामिल हैं। वे दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल के साथ-साथ आंध्र के मुख्यमंत्री से भी मिल चुके हैं और संगीत सिखाने का ऑफर दे चुके हैं। राव न तो कोई बड़े संगीतकार हैं और न ही उन्होंने संगीत की कोई बड़ी ट्रेनिंग ली है, बस वे लोगों को संगीत का आधारभूत ज्ञान देना चाहते हैं।
राव ने एनडीटीवी को बताया कि उनकी बेटी कभी पढ़ाई में पीछे थी लेकिन संगीत सीखने के बाद वह फर्स्ट डिवीजन में पास हुई। राव का मानना है कि संगीत से टेंशन कम होता है और पढ़ाई के प्रति ध्यान बढ़ता है। राव का कहना है कि उन्होंने परिवार को छोड़ा नहीं हैं, परिवार से मिलने भी जाते हैं। बेटी को जब पैसे की जरूरत पड़ती है तो बेटी फोन करती है और फिर राव उसे पैसे भेजते हैं। जब पूछा कि बेटी के लिए पैसा कहां से लाते हैं तो उन्होंने बताया है कि कई बार ऐसा होता है कि गिटार सीखने के बाद लोग उनसे गिटार भी खरीदते हैं उससे वे कुछ पैसा कमा लेते हैं। राव सिर्फ एक रुपए में संगीत सिखाते हैं। एक साल तक सिखाने के लिए सिर्फ 101 रुपए लेते हैं। साल पूरा होने के बाद राव 100 रुपए की एक बांसुरी गिफ्ट के रूप में देते हैं। यानी पूरे एक साल आपको सिखाने के बाद उनको जो फीस मिली वो है सिर्फ एक रुपए। राव स्वरोजगार भी पैदा कर रहे हैं। राव ने काफी सारे भिखारियों को संगीत सिखाया है। वे चाहते हैं कि भिखारी भीख न मांगे बल्कि दूसरों को संगीत सिखाएं और पैसा कमाएं।

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