सिविल लाइन्स फाटक पर प्रस्तावित रेलवे ओवरब्रिज का कॉलोनीवासियों ने किया विरोध

जयपुर। जयपुर विकास प्राधिकरण (जेडीए) द्वारा सिविल लाइन्स रेल्वे फाटक के ऊपर लम्बा फ्लाई ओवर ब्रिज (पुलिया) बनाने के निर्णय का इस इलाके में रहने वाले लोगों का विरोध आरम्भ हो गया है। इस संदर्भ में सिविल लाइन्स स्थित रेल्वे फाटक के रिहायशी क्षेत्रों – जैकब रोड तथा जमना लाल बजाज मार्ग के निवासियों ने मुख्यमंत्री अशोक गहलोत को ज्ञापन दे कर अपना विरोध दर्ज कराया है। इस प्रतिनिधि मंडल में डॉ. शिव गौतम, राजेन्द्र सिंह पचार, महिपत सिंह, डॉ. शशांक नाथ और अक्षत बर्डिया शामिल थे।
 
इस विषय में जानकारी देते हुए राजेन्द्र सिंह पचार ने बताया कि इस रेल्वे ओवर ब्रिज का निर्माण बिल्कुल भी प्रासंगिक नहीं है। यह राज्य की जनता के टैक्स के रूप मे जमा राजस्व का दुरूपयोग होगा। सिविल लाइन्स रेल्वे क्रासिंग छोटी सड़क पर स्थित है तथा इसके साथ-साथ चलती हुए अन्य दो मुख्य सड़के अजमेर रोड तथा बाईस गोदाम रोड़ है, जहां से ज्यादा ट्रैफिक गुजरता है।
 
पचार ने आगे जानकारी देते हुए कहा कि सिविल लाइन्स रेल्वे क्रासिंग के 400 मीटर दायरे मे 3 ओवरहेड ब्रिज, एक मल्टी लेन ओवर ब्रिज, दो ऐलीवेटेड एक्सप्रेस वे तथा एक मेट्रो यह सभी सिविल लाइन्स रेल्वे क्रासिंग से मात्र 400 मीटर के दायरे मे स्थित है। ऐसे में यहां एक ओर पुलिया की कोई आवश्यकता नहीं है क्योंकि यहां इतना अधिक ट्रैफिक भी नहीं है। अतः यह एक व्यर्थ का निर्माण साबित होगा।  
 
महिपत सिंह ने बताया कि यदि यह पुल बन भी जाता है, तो सिविल लाइन जाने वाले यात्री को ब्रिज पार करके सिविल लाइन की ओर यू टर्न लेना होगा। इससे उस यात्री को वही दूरी, समय और पेट्रोल लगेगा  जो उसे 22 गोदाम ब्रिज या अजमेर रोड ब्रिज से होकर जाने पर पड़ेगा। फिर इस पुल पर सरकारी धन की बर्बादी क्यों की जाए। इस पर खर्च होने वाली विशाल धन राशि व्यर्थ में जाएगी। बल्कि सरकार को इस राशि का उपयोग अपनी किसी अन्य लोकप्रिय योजना पर करना चाहिए।
 
डॉ. शिव गौतम ने कहा कि जैकब रोड तथा जमनालाल बजाज मार्ग जयपुर शहर की उन चुनिंदा सड़को में से है जहां यह नया निर्माण इस क्षेत्र की सुंदरता को नुकसान पहुंचायेगा। विशेषकर जब राज्य कोविड-19 महामारी से जूझ रहा है और सरकार के पास आमदनी के ज्यादा स्रोत नहीं है, ऐसे समय मे इस प्रकार के बड़े खर्चे उचित नहीं है। अतः इस प्रस्तावित रेल्वे ओवर ब्रिज के निर्माण पर पूर्ण रोक लगवा कर संभव हो सके तो रेल्वे को पत्र लिखकर सिविल लाइन्स फाटक को पूर्णतया बंद करवाने का कष्ट करावें।
 
डॉ. शशांक नाथ ने आगे कहा कि सिविल लाइन्स मे जहां राजभवन, मुख्यमंत्री निवास तथा राज्य के मंत्रियो के निवास स्थान है। वहां एक और पुलिया इस वीआइपी क्षेत्र की सुरक्षा की दृष्टि से भी अनुकूल नहीं रहेगी। जब-जब कोई धरना, प्रदर्शन, रैली या बंद का आह्वान होता है तब सिविल लाइन्स रेल्वे फाटक को कई-कई दिनों के लिए बंद कर दिया जाता है तथा रेल्वे क्रासिंग के बजाए सभी लोग पुलिया या एलिवेटेड रोड का इस्तेमाल करते है। इसलिए भी आरओबी केे निर्माण की आवश्यकता व्यर्थ प्रतीत होती है।
 
अक्षत बर्डिया ने कहा कि सिविल लाइन्स रेल्वे क्रासिंग से जाने वाले 90 प्रतिशत लोग सिविल लाइन्स व इससे जुडी हुई कॉलोनियों जैसे सूरज नगर पूर्व, शिवाजी नगर, गौरव नगर, भगत वाटिका (दोनों तरफ) सूरज नगर पश्चिम, हरी मार्ग, मदरामपुरा तथा अन्य से हैं, जबकि इस प्रस्तावित रेल्वे ओवर ब्रिज की दिशा दूसरी ओर है जहां मात्र 10 प्रतिशत ट्रैफिक रहता है ।

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