58 प्रतिशत भारतीय रात 11 बजे के बाद सोते हैं, बड़ी वजह मोबाइल, रोग प्रतिरोधक क्षमता व उम्र हो रही कम

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बिगड़ती जीवनशैली और महानगरों में देर रात की शिफ्ट के कारण भारतीयों में नींद की समस्या बढ़ती जा रही है। इस समय में भारत की लगभग 30 प्रतिशत आबादी नींद की समस्या से पीडि़त है। यह संख्या आने वाले सालों में और बढ़ेगी जो चिंता का विषय है। 

वेकफिट की ओर से द ग्रेट इंडियन स्लीप स्कोरकार्ड नाम से जारी रिपोर्ट में सामने आया है कि 58 प्रतिशत भारतीय रात 11 बजे के बाद सोते हैं। देर से सोने के पीछे की बड़ी वजह सोने से पहले मोबाइल का इस्तेमाल है। जबकि लेट नाईट काम के दबाव के कारण देर से सोने के मामले में चेन्नई, गुरुग्राम और हैदराबाद सबसे आगे हैं। एक अलग शोध के अनुसार 88 प्रतिशत भारतीय सोने से ठीक पहले अपने फोन का उपयोग करते हैं। यह संख्या 2019 में 62 प्रतिशत थी। 54 प्रतिशत सोशल मीडिया के इस्तेमाल के कारण देर से सोते हैं। 

मोबाइल, टीवी और अन्य इलेक्ट्रॉनिक गैजेट्स के ज्यादा इस्तेमाल से हमारी स्लीप सायकल बिगड़ रही है। इन सबके कारण हमारी 'सकैंडियन रिदम' प्रभावित हो रही है जो हमारे शरीर में होने वाले मानसिक, व्यवहारिक और शारीरिक परिवर्तनों को संतुलित करने के लिए जिम्मेदार है। 

नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ जनरल मेडिकल साइंस के अनुसार, आम तौर पर सूर्य और अंधेरे की प्रतिक्रिया के रूप में यह रिदम 24 घंटे का चक्र चलाती है, लेकिन देर से सोने से यह रिदम गड़बड़ा जाता है। हार्वर्ड मेडिकल स्कूल में हुई शोध के मुताबिक 'सकैंडियन रिदम' प्रभावित होने से हमारी रोग प्रतिरोधक क्षमता कमजोर हो रही है। वहीं इससे नई चीजें सीखने की क्षमता पर भी गहरा प्रभाव पड़ रहा है। 

देर से सोने पर इन समस्याओं के अलावा हमारी उम्र भी कम हो रही है। इसके साथ ही मोटापा, एंग्जायटी और डिप्रेशन जैसी समस्या भी हमें घेर रही हैं। 'सकैंडियन रिदम' प्रभावित होने से हार्मोन रिलीज और बॉडी का तापमान प्रभावित हो रहा है। लंबे समय तक देर तक सोने की आदत हमारी मानसिक एकाग्रता पर भी असर पड़ता है।